MD SHAYEED ALAM 08 Apr 2026 कविताएँ समाजिक कविता 7626 0 Hindi :: हिंदी
भरी रही तेरी इफ्तार की थाली, पर जिसकी थाली रह गई थी खाली। उनकी भी फिक्र तुम कर लेना। अल्लाह की नेमत है तुझ पर भारी, कर ली है तूने पूरी ईद की तैयारी। पर जिनकी है मजबूरी और लाचारी। उनकी भी मुबारक तुम कर देना। अपनी बीवी बच्चों पर तूने हजारों है खर्चे, पर जिनके सर पर हैं कर्जे, उनकी भी मदद तुम कर देना। उनकी भी ईद मुबारक तुम कर देना।।