DINESH KUMAR KEER 25 May 2023 कविताएँ समाजिक 28072 0 Hindi :: हिंदी
इक सहमी सहमी सी आहट है, इक महका महका साया है, ये एहसास तुम्हारी मोहब्बत का, ना जाने क्या रंग लाया है, ए यार सनम कुछ तू ही बता, तू मुझे इतना क्यों भाया है, ये दिल प्रेम खोज में निकला था, और तुझ को ढूँढ के लाया है...