प्रवीण कुमार 11 Oct 2025 कविताएँ दुःखद 9264 0 Hindi :: हिंदी
एहसास की कथनी बनी, जिंदगी। सच्चा,झूठा कहने को, जिंदगी। मासूमियत भी, दोस्त की मिसाल -सी बनी, जिंदगी। पहाड़ों में तो जिंदा है। इन्सान में कहीं। शायद! कंगाल ही है, जिंदगी। एहसास की कथनी बनी, जिंदगी। सच्चा, झूठा कहने को, जिंदगी। ताकत क्या लूटकर ही आएगी। अगर यूं कहूं - इरादों में कड़वाहट लें आएगी। मगर,मेरे दोस्तों! ऐसा मेरा एहसास भी नहीं। छोटी बात भी है, पर सच नहीं। एहसास की कथनी बनी, जिंदगी। सच्चा, झूठा कहने को, जिंदगी। मासूमियत भी दोस्त की, मिसाल -सी बनी, जिंदगी।