महेश्वर उनियाल उत्तराखंडी 19 Jun 2026 कविताएँ प्यार-महोब्बत #एक विधवा की व्यथा #मधुबाला #लफ्ज 2847 0 Hindi :: हिंदी
‘‘एक विधवा की व्यथा’’ सामने इस महल में एक मधुबाला रहती है, जहां से मौन रुपी एक धारा बहती है, लफ्ज बंधे हुए है फिर भी कुछ कहती है, चीरती कलेजे की आंधी को वह सहती है। खण्डहर के अन्दर से एक ज्वाला सी आ रही है, दर्द गमों को वह जैसे, छुपा रही है, अरमानों के जलने की बू आ रही है, हृदय के हर कण को वह पिघला रही है, पूछे भी तो क्या पूछे दासतां कठिन लगती ह,ै उससे मिलने की आस अब तो दिल में जगती है। सफेद चादर ओढ़े हुए वह हिमगिरी सी लगती है, अंधेरा छाया हुआ है चारों ओर फिर भी बत्ती सी एक जलती है कभी रहती होगी सपनों में कभी रहती होगी अपनों में आज क्या हाल है उसका जब वह सोती है, सिर्फ कफनों में क्या लिखंू बारे में उसके जिसका जीवन ठहरा पानी है, बिधवा है वह, बिधवा है, जिसकी यह बेवस कहानी है। लेखक- महेश्वर उनियाल 7579155644