Amarnath Yatra 29 Nov 2025 कविताएँ प्यार-महोब्बत प्यार और मोहब्बत, दर्द ,दिल, इश्क, 7968 0 Hindi :: हिंदी
कहीं एक खालीपन था, जो भर नहीं पाया, एक चेहरा अपना–सा था, जो सच में अपना बन नहीं पाया। सुबह की पहली धूप में भी तेरी ही कमी सी लगी, भीड़ के बीच खड़े होकर भी, दिल को तन्हाई सी लगी। लगता था तू साथ चलेगा, हर मोड़, हर रस्ते पर, पर तू तो बस गुज़र गया, मौसम की बदली हवा की तरह। दिल ने जिसे “मेरा” लिखा, वो किसी और का अफ़साना निकला, जो ख्वाब आँखों में था, वही सबसे बड़ा झूठ निकला। अब सीख लिया है थोड़ा, खुद से भी रिश्ता रखना, जो लोग अधूरे रह जाते हैं, उन्हें वहीं छोड़ देना। तू मेरा होकर भी मेरा हुआ नहीं, यही सच मुझे अब समझ आया, किसी एक के जाने से जीवन रुकता नहीं, ये एहसास नया–सा घर लाया।