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गरमी

Laxmi nishad 25 Jul 2024 कविताएँ अन्य गरमी 24965 0 Hindi :: हिंदी

गरमी  के दिन आते हैं, 

हमकों  बहुत सताते हैं ।

कहाँ  खेलने जाये हम ?

तेज धूप में  निकले दम ।

खेल का मैदान  गरम ,

लू  को आती नहीं  शरम  ।

कही  चैन  न  पाते  हैं, 

मन  ही  मन झुंझलाते  है ।

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