Avnish Dutt 14 Apr 2026 कविताएँ समाजिक Teachers k liye kavita, poetry regarding teachers, kavita for teachers, Guru k samman mai kavits, Guru ka humare jivan mai mahatav, Guru k liye kavita 9935 1 5 Hindi :: हिंदी
गुरु: जीवन की आधारशीला 🌟 जब तक हाथ न लगे कुम्हार का, मिट्टी साँचे में नहीं ढलती है। नाविक बिन तो नाव भी नहीं सही दिशा पकड़ती है। जब तक बीज को न मिले किसान, भला फसल भी कहाँ पकती है। बाती बिन तो भरे दीये से भी, रोशनी नहीं निकलती है। शिक्षक ही है आधार धरा का, जैसे धरती पर सूरज की किरणें पड़ती हैं। जीवन के इस दौर में माना संघर्ष बहुत है, लेकिन गुरुओं के हमारे हौसले बहुत हैं। जब भी तुम लड़खड़ाओगे, संघर्ष का यह मैदान छोड़ना चाहोगे, मेरा दावा है, तुम्हारा विश्वास जो जागेगा, धैर्य और साहस बनकर वह गुरु ही है, जो तुम्हारे साथ भागेगा। वह सही राह हमें दिखाता है, और फिर कहीं लुप्त हो जाता है। इनका त्याग सर्वोपरि है, इसकी नहीं कोई सीमा बंधी है। अपनी झोली में यह कुछ भी नहीं बचाता है, बदले में हमसे बस एक चीज़ चाहता है— उपलब्धियों का यह आकाश मेरे बच्चों को भी मिले, नभ का कोना-कोना अलंकृत हो, और कदमों में इनके भी फूल बिछें। जीवन देखने का इनका नज़रिया थोड़ा अलग है, लोक-निंदा का भी न इन्हें डर है। द्रोणाचार्य अगर एकलव्य का अंगूठा न मांगते, कर्ण को अगर शिक्षा के नियमों में न बांधते, अर्जुन सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर नहीं बन सकते थे, धर्म-विजय रथ पर भी नहीं चढ़ सकते थे। दोष इनका कुछ भी नहीं है, पर आरोपों का केंद्र बिंदु यही है। यहाँ भार भी गुरु ही उठाता है। गलती ना भी हो, पर अपनी गलती ही बताता है। मार्ग के सारे कंकर-पत्थर हमारे चुपचाप वही हटाता है। शायद इसलिए यही हमारा भाग्य विधाता कहलाता है, भाग्य विधाता कहलाता है।
3 months ago