Poonam Mishra 27 Jul 2024 कविताएँ समाजिक गुरु की महिमा को शब्दों में ना बयां कर सकी 32337 0 Hindi :: हिंदी
शीर्षक ---- गुरु की महिमा गुरु की महिमा को शब्दों में बयां करना बहुत मुश्किल है प्रथम पाठशाला घर से शुरू होती है जिसमें मां होती है पहली गुरु ! जिसने गिर कर, उठना ,उठकर गिरना , अच्छे बुरे का ज्ञान दिया ! मेरी मां है पहली गुरु ! कुछ यूं दुनिया से अनजान थे हम तुमने मुझे आकार दिया । जीवन के इस पथ पर चलने के लिए तुमने मुझे तैयार किया । अपनी ज्ञान की बातों से मेरा। जीवन उज्जवल किया । मेरी कमियों को बता कर मुझे भले बुरे का ज्ञान दिया। उंगली पड़कर तुमने मुझे दुनिया की पाठशाला में डाल दिया , जीवन में हम सीखते ही रहे कई गुरुओं का ज्ञान मिला। उन गुरुओं की महिमा को मैं, शब्दों में ना बखान सकी ! धन्य है वह गुरु जिन्होंने मुझे जीने का एक सार दिया स्वरचित लेखिका पूनम मिश्रा उत्तर प्रदेश वाराणसी (मास्टर ऑफ़ आर्ट्स M,A) (बैचलर ऑफ़ एजुकेशन B,ed ,,) ,बॉम्बे आर्ट