संदीप कुमार सिंह 01 Jul 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 18696 0 Hindi :: हिंदी
मुक्तक छंद हारे का हरि नाम है, मन को रखिए शांत। धीरज रखना छोड़ मत,हरि तो हैं अतलांत। होना नहीं निराश है, तृप्त करें हरि प्यास_ पूर्ण करे सब हरि सदा,जीवन हो तब कांत। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....