Maushami 07 Jun 2023 कविताएँ अन्य हैरत # माँ # बाप # ज़मीन # आसमान 25127 0 Hindi :: हिंदी
हैरत नहीं होती अब चाहे ज़मीन धंसे या आसमान फट जाए या कोई युद्ध या प्रलय आ जाए, या कोई धोखा दे जाए या गद्दारी कर जाए, हैरत नहीं होती। हैरत नहीं होती अब कोई कुछ भी कह कह जाए या मुसीबत में पीठ दिखा जाए, या औलाद बूढ़े माँ बाप को वृद्धाश्रम छोड़ आए हैरत नहीं होती, हैरत नहीं होती।