Shubhashini singh 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक Google /Yahoo/Bing /instagram/Facebook/twitter 74218 0 Hindi :: हिंदी
तुम्हारे लिए नहीं है
हे स्त्री ये दुनिया
तुम्हारे लिए नहीं है
और ना ही महफूज है
ये दुनिया तुम्हारे लिए
आए दिन हर जगह दुष्कर्म होता
तुम्हारे जीवन के साथ यहां खिलवाड़ होता
हे स्त्री ये दुनिया तुम्हारे लिए नहीं है
तुम्हारे छोटे कपड़ों से जिनकी आंखे फुटे
जिस समाज की सोच थोड़ी ऊपर ना उठे
हे स्त्री ये दुनिया तुम्हारे लिए नहीं है
जो तीन साल की बच्ची को भी ना बक्छे
जो दूसरों के मां बहन को भी ना छोड़े
हे स्त्री ये दुनिया तुम्हारे लिए नहीं है
अरे अो दुनिया को नसीहत देने वालों
उस तीन साल की बच्ची को जीने से
पहले मारने वालो
और हर लडकी को बुरी नज़र से देखने वालो
क्या कसूर है उसका जो तुम इस तरह के हैवानियत पर उतरने वालो
ज़रा सोच के तो देखो उस स्त्री पर क्या गुजरती होगी
जो हर दम घुट घुट कर मरती होगी
हे स्त्री ये दुनिया तुम्हारे लिए नहीं है.....
सुभाषिनी सिंह