MD SHAYEED ALAM 15 Nov 2025 कविताएँ समाजिक कविता मोहम्मद सईद आलम 9670 0 Hindi :: हिंदी
जो अगर शौक कम होने लगे तुम्हारे, समझो बुढापा आने लगा है। अपने से ज्यादा अब तुम्हें, ख्याल औलादों का आने लगा है। इस कदर अपने शौकों को यूं ना मारो मेरे यारों, कि अगर अभी जिंदा हो तो जिंदा नजर आओ मेरे यारों।।