Anilkumar Rathwa (Sameer) 16 Dec 2025 कविताएँ समाजिक 9424 0 Hindi :: हिंदी
कितनी भी योजनाएँ बना लो तुम, नक़्शे, रास्ते, मंज़िल के सपने— आख़िरी मोहर समय ही लगाता है, बाक़ी सब तो इंसान के अपने-अपने भ्रम हैं। हम सोचते हैं सब हमारे हाथ में है, मेहनत, समझदारी और हिसाब के सहारे, पर एक पल में समय बता देता है— कौन राजा है और कौन मोहरे। जो कल था, वो आज नहीं रहता, जो आज है, वो कल ढल जाएगा। इस सच से भागोगे जितना भी, वक़्त तुम्हें पकड़ ही जाएगा। पर यहाँ एक बात समझ लेना, समय दुश्मन नहीं, आईना होता है। वो तुम्हें तोड़ता नहीं है कभी, वो बस तुम्हें तुम्हारा सच दिखाता है। जो हालात में भी खुद को नहीं छोड़ता, जो अंधेरे में भी मेहनत जलाता है, समय उसी के लिए करवट लेता है, किस्मत भी उसी का गीत गुनगुनाती है। रोना है तो रो लो एक पल को, पर वहीं डेरा मत डाल लेना। क्योंकि वक़्त उनके लिए नहीं रुकता, जो बीते कल में जाल बिछा लेना। उठो, बदलो, स्वीकार करो, जो है उसी से शुरुआत करो। क्योंकि समय हारता नहीं कभी, पर समय से सीखने वाला सब कुछ जीत लेता है।