NEM SINGH RAJPUT SARFIRA 04 Oct 2025 कविताएँ दुःखद 21524 0 Hindi :: हिंदी
जब आंख से आंसू बहते हैं
तब
अंदर की कुछ बात कहते हैं
जब निकलते है
दुख दर्द की ज्वाला लेकर
तब
अपने ही इस बात को सहते हैं
होते हैं
खुले किताब के पन्नों की तरह
होते पर शब्द
अधूरे होते हैं
समझने वाले समझ लेते हैं
जिनकी आंखों में दूसरों
के लिए
आंसू होते हैं
गैरों को क्या पता
ये आंसू किसके लिए बहते हैं
जब आंख से आंसू बहते है
तब
अंदर की बात कहते हैं