Poonam Mishra 29 Jan 2026 कविताएँ प्यार-महोब्बत यादें 4943 0 Hindi :: हिंदी
दैनिक काव्य सृजन दिन- बुधवार दिनांक 21 -1 _2026 शीर्षक ----यादें ही यादें जब शाम ढले मेरे घर पर यादों की दस्तक होती है मन फिर बेचैन होकर न जाने क्यों? पुराने दिन में खो जाता है! जो गुजर गए उन पलों का यादों का मेला लगता है। उन यादों के मेलों में मन बेचैन हो उठना है! बचपन उन गलियों में दौड़, दौड़ बीता।! उन गलियों की याद पुरानी है! कुछ पाने खोने की चाहत में जीवन का समय गुजर गया। मुड़ कर देखु उन गलियों में अब स्मृति शेष ही रह गया। आज न जाने क्यों? मन उन यादों में जाकर उलझ गया पूनम मिश्रा उत्तर प्रदेश वाराणसी