Sanam kumari Shivani 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक 51346 0 Hindi :: हिंदी
आजादी के बहुत साल में बहिना गै। हम जहीना के ताहिना गै न मंहगी बढल उपज नहीं बढ़ाई टेढ़ी हल के साथ न छुटलै बेरोजगारी परल छैथ घर में कोना गढ़ाइब गहना गै न आजादी...….................2 जब जब हमरा लागल बुखार तुलसी के काढ़ा तैयार डॉक्टर बाबू बारा अजनबी नेता हमर ठगना गै न आज़ादी के बहुत साल में बहिन गै हम जहीना के ताहिना गै ना2 मुखिया जी सुखिया भई गेलन महल अटारी सेहो बनेलन हमर झोपरीया कानी रहल अइछ दिन बिताई ये कहना गै न आज़ादी.................... 2