Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

Monu kumar 15 Jul 2026 कविताएँ समाजिक NON VEG , VEG , MEAT ,ANIMAL 232 0 Hindi :: हिंदी

हमें जंगल से पकड़ते हो,
किसी को नदी से पकड़ते हो।
कभी पिंजरे में रखते हो,
कभी जाल से पकड़ते हो।

हमें आग में भूनते हो,
फिर तेल में तलते हो।
कभी पतीले में उबालते हो,
कभी हमारी चमड़ी उतारते हो।

क्या गलती थी हमारी?
हमने तो बस जन्म लिया था।
बस इतना ही बताओ,
हमारा कसूर क्या था?

कभी बलि पर चढ़ाते हो,
कभी भोग लगाते हो।

क्या ऐसा भी समय आएगा,
जब हमारा राज होगा?

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: