Monu kumar 15 Jul 2026 कविताएँ समाजिक NON VEG , VEG , MEAT ,ANIMAL 232 0 Hindi :: हिंदी
हमें जंगल से पकड़ते हो, किसी को नदी से पकड़ते हो। कभी पिंजरे में रखते हो, कभी जाल से पकड़ते हो। हमें आग में भूनते हो, फिर तेल में तलते हो। कभी पतीले में उबालते हो, कभी हमारी चमड़ी उतारते हो। क्या गलती थी हमारी? हमने तो बस जन्म लिया था। बस इतना ही बताओ, हमारा कसूर क्या था? कभी बलि पर चढ़ाते हो, कभी भोग लगाते हो। क्या ऐसा भी समय आएगा, जब हमारा राज होगा?