Neetesh Shakya 30 Mar 2023 कविताएँ धार्मिक वर्ण व्यवस्था by Neetesh Shakya 55445 0 Hindi :: हिंदी
जाति पांत में बांट दिया, इन्सान बना अछूत से। मानव को सम्मान नहीं, पवित्र पशु का मूत रे॥ पहनने को कपडे नहीं मिलते, पानी नहीं तालाब से। भूख प्यास से मरते हैं, ये कैसा हिन्द का हाल रे॥ मान नहीं सम्मान नहीं, वहां कैसे जिंदगी जीते। पाखंडों में फंसकर के, पशु की गन्दगी पीते॥ मनुवादी से घिरे रहे, जिन्दगी बडी (बनी) बेहाल रे। जीने का अधिकर नहीं, कैसा किया हाल रे॥ क्यों जीते हो ऐसी जिन्दगी, एन. एन. तुम्हें समझावे। अपनाले अब बुध्द शरण, राह सही बतलावे॥ जाति पांति के भेद भाव से, छुटकारा मिल जावे रे। अंधविश्वास में बने रहे, अब आके ज्योति जलाले रे॥ मेरी लेखनी गल्त लागे, माफ करे कसूर रे। मानव को सम्मान नहीं, पवित्र पशु का मूत रे॥
CSC Employee, Cyber Crime Work 💔टूटे हुए सपनों को बनान�...