SANDIP KUMAR SINGH 16 Jun 2023 कविताएँ समाजिक प्रक्रिया,जारी,रहता,आवश्यक 28180 0 Hindi :: हिंदी
जीवन एक चक्र समान ही है, सतत यह प्रक्रिया जारी रहता है। जन्म_मृत्यु का का खेल, निरन्तर जारी रहता है। यहां सब एक _दूसरे पर आश्रित हैं, एक के बिना दूसरा अधूरा है। श्रृष्टि के सन्तुलन के लिए अनिवार्य है, खाद्य पदार्थों पर मानव जीवन है। मानव से खाद्य पदार्थ यह अन्योनाश्रय संबंध है। योनी दर योनी भटकना पड़ता है, कर्म बन्धन में बंधा रहना पड़ता है। पुण्य कर्म के फलस्वरूप, जीवन में सु:ख सुविधा मिलता है। लेकिन मानव जीवन के बाद, लक्ष्य मोक्ष प्राप्ति का होना चाहिए। मोक्ष प्राप्ति के लिए, कर्म बन्धन से मुक्त होना पड़ता है। कर्म बन्धन से मुक्ति के लिए, सांसारिक जीवन को त्यागना पड़ता है। पूर्ण सन्यासी बनकर जीने से, कहीं कई जन्मों उपरान्त, बन्धन से मुक्ति मिल सकता है। चौरासी लाख योनी के बाद, मानव तन मिलता है, इस अनमोल मानव जीवन को, यूं व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। सार्थक कर्म कर, अपने आपको साबित करना पड़ता है। फिर दूसरा जन्म सुखद मिलता है, दु:खों का सामना नहीं के बराबर होता है। संदीप कुमार सिंह ✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार