Sudha Chaudhary 01 Jun 2023 कविताएँ अन्य 35026 0 Hindi :: हिंदी
सब कुछ सह लेने के बाद, बहुत कुछ कहना आया। जीवन की इस झंझा में नये रुप में बहना आया। ये अधूरी सी कथा कुछ खास है। बीच बनते धार में, इस बात का अहसास है। व्याकुल व्यथा तुम को नहीं पता। मैंने संशय की एक रात में, सीख लिया सब एक साथ में। ऐसे नहीं थे, कहां हम नहीं थे। जहां दर्द था, वही,हम वही थे। सत्य से मेरा परिचय नहीं, झूठ की मैं मूर्ति नहीं। आधार हूं अपने अवलंब की, जिससे कोई प्रति द्वंद नहीं। सुधा चौधरी बस्ती