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जिंदगी बदल के रख दिये

Preksha Tripathi 24 Jun 2023 कविताएँ दुःखद 43992 2 5 Hindi :: हिंदी

मेरी पूरी ज़िंदगी
बदल के रख दिये। 
महोदय ने उसमें
कदम जो रख दिये।। 
अकेले थे हम
पहले मस्त ज़िंदगी। 
कट रही थी मेरी
थी न कोई बेखुदी।। 
आ गए थे यूँ वो
कहने के वास्ते। 
बाँटता हूँ आज से
मैं दुःख के रास्ते।। 
अपनी मीठी बातों से
वो मुझसे छल किये। 
मेरी समस्याओं का 
न कोई हल दिये।। 
हर समय की भावना को
साझा तो किये। 
 हम भी उनको अपना
सहारा बना लिए। 
क्या कहूँ मैं और 
हमें क्या ही वो दिये। 
खुद को मेरी आदत
बना के चल दिये।। 

प्रेक्षा त्रिपाठी 
प्रतापगढ़ उत्तरप्रदेश

Comments & Reviews

VIVEK KUMAR PANDEY
VIVEK KUMAR PANDEY घर में मिलेंगें उतने ही छोटे कदों के लोग,दरवाजे जिस मकान के जितने बुलंद है! शुभाशीष

2 years ago

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VIVEK KUMAR PANDEY
VIVEK KUMAR PANDEY घर में मिलेंगें उतने ही छोटे कदों के , दरवाजे जिस मकान के जितने बुलंद ! शुभाशीष

2 years ago

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