akhilesh Shrivastava 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक ज़िन्दगी की वास्तविकता 49266 0 Hindi :: हिंदी
* ज़िन्दगी की मंजिल *
इस ज़िन्दगी में मंजिल,
पाना बहुत कठिन है।
कभी रास्ते कठिन है,
कहीं रास्ते नहीं है ।
हम खोज में इसी की,
देखो भटक रहे हैं।
मंजिल मिलेगी कब ,
हमको पता नहीं है ।
बड़ा सा मकान है,
पर उसमें घर नहीं है ।
ऐशो आराम बहुत है,
पर मन में शुकूं नहीं है ।
बिस्तर पर लेटते हैं ,
पर आंखों में नींद नहीं हैं।
कैसे कटेगी ज़िन्दगी,
हमको पता नहीं है ।
मिले दोस्त तो बहुत ,
पर दोस्ती नहीं है ।
धोका है हर क़दम पर ।
नेकी कहीं नहीं है ।
अपने तो बनते हैं पर ,
अपनापन अब नहीं है ।
जी रहे हैं यहां हम,
पर जिन्दगी नहीं है ।
ज़िन्दगी के इस सफर में,
साथी कोई नहीं है ।
सांसो के रूकते ही
फिर तेरा कोई नहीं है ।
लम्बी उम्र जिए हम ,
नहीं जिए ज़िन्दगी हम ।
इस तरह हमारा जीना ,
कोई ज़िन्दगी नहीं है ।
मिल पायेगी हमें मंजिल ,
ये मुमकिन अब नहीं है ।
मज़े से जियो ये जिंदगी ,
फिर जिंदगी नहीं है ।
अरमान कर लो पूरे ,
सही ज़िन्दगी यही है ।
खुशहाल हो ये जीवन,
यही जिन्दगी की खुशी है।
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