Rakshi 15 Feb 2025 कविताएँ अन्य 23442 0 Hindi :: हिंदी
जो छूटा जहां उसको वही रहने दिया, सोचा नहीं जो हुआ उसे होने दिया; थम जाएं ऐसों से ख़ुद न मिलने दिया, समझाया खुद को न पैरवी करने दिया, अपना होता तो लौट के आता वापस, पराया था तो गैर ही रहने दिया, कश्मकश से भरी थी ये ज़िन्दगी दूर किया जबसे सुकून सा पहरनेे दिया, दोस्त ऐसा हो तो गोया दुश्मन ही भला दुश्मन ए अक्ल को फिर दूर ही रहने दिया रुखसार परवीन