Raj Ashok 05 May 2023 कविताएँ समाजिक जुनून,जज्बात 46537 0 Hindi :: हिंदी
जुनून, जज्बात
कोई एक बात नहीं ।
फर्क ,बहुत है।
इन भावों मे ,
खौफ दिखा ना । मुझे किताबों का
मेने बहुत कागज की
नाव पार उतारी है।
यो़ दरिया मे
डूबने वाले । हम नहीं
तैर के पार जाऐगे ।
देखा देगें ,हर एक शक्स को
के रखते है। हम अपनी
मुट्ठी मे , ये जमाना
हाथों की लकीरें
हम सलाम ,करती है।
तकदीर हमारी वो है।
जो हम चाहते है