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कागा मोती चुग रहे-साँप बना है दोस्त

संदीप कुमार सिंह 25 Jul 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 46170 10 5 Hindi :: हिंदी

(दोहा छंद)
कागा मोती चुग रहे,साँप बना है दोस्त।
समय समय का फेर है,खाते सब हैं गोस्त।।

कागा मोती चुग रहे,मैना खाए दाल।
चले जमाना भूल में, जीवन है बदहाल।।

कागा मोती चुग रहे,ओढ़े सभी नकाब।
और विश्वास अब नहीं,जगत हुई बेआब।।

कागा मोती चुग रहे,दाना खाए हंस।
उलटा अब संसार है,मामा बहु अब कंस।।

कागा मोती चुग रहे,हैरत में है जान।
  साधु बना शैतान है,संकट में है आन।।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍️
जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार

Comments & Reviews

संदीप कुमार सिंह
संदीप कुमार सिंह शानदार

3 years ago

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संदीप कुमार सिंह
संदीप कुमार सिंह बढ़िया प्रस्तुति

3 years ago

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संदीप कुमार सिंह
संदीप कुमार सिंह उत्तम रचना

3 years ago

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संदीप कुमार सिंह
संदीप कुमार सिंह अति सुन्दर

3 years ago

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संदीप कुमार सिंह
संदीप कुमार सिंह बेजोड़

3 years ago

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संदीप कुमार सिंह
संदीप कुमार सिंह लाजवाब

3 years ago

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संदीप कुमार सिंह
संदीप कुमार सिंह बहुत खूब

3 years ago

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