Sandeep ghoted 09 Jul 2023 कविताएँ अन्य काले बादल famous poem 68339 5 5 Hindi :: हिंदी
काले बादल बरसो तुम बरसो तुम मेघधरा दर बरसो तुम तुम हो काले काले काजल को भी फीका डालें नवजीवन की पुकार लिए तुम बढ़ते जाओ तुम बढ़ते जाओ बरसो तुम बरसो तुम मेघधरा दर बरसो तुम तुम्हारी ठंडक भू को ठंडक कर दें फलित ज्योति जग में खुशियों की पुकार लिए तुम बढ़ते जाओ बढ़ते जाओ ग्रीष्म काल की इस गर्मी का तोहफा तुम ठंडक दो आभा फाल्गुन को मुहाने वाले शीतलहर में बरसों तुम बरसो तुम बरसो तुम मेघधरा दर बरसो तुम
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Hi 👋 My name is a Sandeep ghoted I am living in Rajasthan I am becoming of an ias and Ras office...