Anilkumar Rathwa (Sameer) 13 Nov 2025 कविताएँ समाजिक “पहचान” 14321 0 Hindi :: हिंदी
काम करो ऐसा कि एक पहचान बन जाए, हर कदम यूँ बढ़ो कि निशान बन जाए। यहाँ तो साँसें सब ले लेते हैं ज़िंदा रहने को, ज़िंदगी जियो इस तरह कि मिसाल बन जाए। रास्ते मुश्किल होंगे, ठोकरें मिलेंगी हज़ार, पर मंज़िल उन्हीं की होती है जो रखते हैं विचार। पसीना बहाओ तो कुछ कर दिखाओ, क्योंकि किस्मत भी मेहनतवालों को सलाम ठोकती है बार-बार। वक़्त से मत डरना, वक़्त को मोड़ना सीखो, हार से मत रुकना, फिर से जोड़ना सीखो। कभी गिरो तो उठो, मुस्कुराओ, आगे बढ़ो, क्योंकि असली जीत वही है जो दर्द के बाद खिलती है रोशनी की तरह। लोग कहेंगे — "छोड़ दो, यह मुमकिन नहीं", पर तुम कहो — "मैं करूँगा, क्योंकि मैं हिम्मत हूँ यकीन नहीं!" अपने सपनों को आग बना लो, फिर देखो — ये जहाँ तुम्हारा नाम गुनगुनाएगा दिन-रात सही। तो चलो ऐसा काम करो कि जमाना याद रखे, हर कदम ऐसा हो कि आने वाली पीढ़ियाँ भी पढ़े। ज़िंदगी का मकसद सिर्फ जीना नहीं, बल्कि कुछ ऐसा कर जाना है — कि जब नाम आए… तो लोग कहें, “हाँ, यही वो शख्स है जिसने वक़्त को बदल डाला था।”