Meena ahirwar 30 Mar 2023 कविताएँ हास्य-व्यंग कविता 127500 0 Hindi :: हिंदी
मन करता फिर,
एक बच्ची बन जाऊँ।
कुछ हसींन यादों को ,
फिर बचपन में पाऊँ।।
मेरा रूठना और माँ का मनाना,
उन यादों में खो जाऊँ ।
और दौड़-दौड़ कर,
फिर माँ को हंसाऊ।।
काश मैं फिर ,एक बच्ची बन जाऊँ
मेरे हाथ मैं मिट्टी देख ,
माँ फिर दौड़ी- दौड़ी आये।
मान जा बेटी मिट्टी है,
ये कहकर समझाए । ।
मन करता फिर,
उन यादों में डूब जाऊँ ।।
काश मैं फिर एक बच्ची बन जाऊँ
हाथ में रोटी लेकर माँ,
फिर दौड़ी -दौड़ी आये।
और बड़े प्यार से राजकुमारी कहकर,
रोटी मुझे खिलायें।।
काश मैं फिर ,एक बच्ची बन जाऊँ