संदीप कुमार सिंह 17 Jun 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत कायनात में तुझ सा नहीं, कोई हसीन, न ही है कोई तुमसे बढ़कर रंगीन, काली जुल्फों में तुम हो एक हीर, बड़े_बड़े दीवानों के लिए तुम हो जंजीर, चमन में खिलता हुआ तुम हो गुलाब, और कोई भी चेहरा नहीं है तेरा जवाब, लरजते होंठ तेरे जिस पर रहते प्यार का अल्फाज, शहद घुली हुई रहती आपकी आवाज, पावों में पायल की झनझन, हाथों में पहनी हो कंगन, हुस्न में तुम जैसे हो लंदन, नैनों में नशा, ओ रुखसाना, देखकर भूल गया मयखाना, जिस्म प्यार की जागीर लगती, रहूं अब मैं तेरा दीवाना 36653 0 Hindi :: हिंदी
कायनात में तुझ सा नहीं कोई हसीन, न ही है कोई तुमसे बढ़कर रंगीन। काली जुल्फों में हो तुम एक हीर, बड़े_बड़े दीवानों के लिए हो जंजीर। चमन में खिलता हुआ तुम हो गुलाब, और कोई भी चेहरा नहीं है तेरा जवाब। लरजते होंठ तेरे जिसपर रहते प्यार का अल्फाज, शहद घुली हुई रहती आपकी आवाज। पावों में पायल की झनझन। हाथों में पहनी हो कंगन। ऊंचा_लम्बा मनोहर है कद_ हुस्न में तुम जैसे हो लंदन। नैनों में नशा ओ रुखसाना। देखकर भूल गया मयखाना। जिस्म प्यार की जागीर लगती_ रहूं अब मैं तेरा दीवाना। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा) बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....