Naresh kumar 30 Nov 2025 कविताएँ दुःखद विवशता, अंबर, उड़ान, विख्यात, बारिश, तूफान, उंगली,नियत 9430 0 Hindi :: हिंदी
कुछ क्षण की विवशता है मेरी परिचित हूं मैं, परिणामों से पर आने दो मैं अंबर को नापूंगा अपनी उड़ानों से मुझे नाम की चिंता जरा, नहीं विख्यात हूं अपने कामों से बारिश न बुझा सकी, मुझको मैं डरुगा, क्या, तूफानों से नहीं कोई जो, कठिन डगर पे मुझको चलना सिखलाये अपनी उंगली उठाके मुझको लक्ष्य मेरा जो दिखलाये मैं खुद रखता हूं ,साफ नियत क्यों,आंस करूं ,बेईमानों से पर आने दो मैं अंबर को नापूंगा, अपनी उड़ानों से