MD SHAYEED ALAM 17 Nov 2025 कविताएँ समाजिक कविता मोहम्मद सईद आलम 12999 0 Hindi :: हिंदी
कहां जाऊ? किधर जाऊं ? किसे सुनाऊं ? किसे बताऊं? अपने दर्दे दिल की दास्तान, ना कोई सुनने वाला, ना कोई समझने वाला। जिंदगी में जो भी मिला, सब मतलब का यार मिला।।
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