संदीप कुमार सिंह 06 Nov 2025 कविताएँ प्यार-महोब्बत #कार्तिक पूनम#अनुपम नजारा को देख कर है खुशियाँ बरस रही # घर = आँगन, रास्ते, गलियाँ, वन, उपवन हैं चमक रहें #ऐसा लगता है महफ़िल जमी है आज आसमान पर #रागिनी की भेंट दे रहा है दिल से आज लोक को #चारु चाँद की चंचल किरणें कण-कण को है चमकाती #सुखधाम की अप्सरायें भी यहाँ आने को है तरस रही #प्रेमी युगल हर हद पार करने को है आतुर प्यार की l 8585 0 Hindi :: हिंदी
कार्तिक पूनम का चाँद है आज अपने शबाब पर l आज की रात को नाज है अपने महताब पर l जन्नत बनी है आज धरती हैरान है आज स्वर्ग भी_ लोगों में अद्भूत उत्साह है कुदरत की आब पर ll अनुपम नजारा को देख कर है खुशियाँ बरस रही l सुखधाम की अप्सरायें भी यहाँ आने को है तरस रही l चारु चाँद की चंचल किरणें कण-कण को है चमकाती _ हर हाल में सुधा=रोशनी है जीवों के लिये सरस रही ll घर = आँगन, रास्ते, गलियाँ, वन, उपवन हैं चमक रहें l जुनूनी लोगों के अरमान असीम आज हैं गमक रहें l माहौल भी है आज बदला=बदला रगों में है खुशियाँ_ डाली=डाली,पत्ते_पत्ते,फूल=फूल भी हैं आज दमक रहें ll ऐसा लगता है महफ़िल जमी है आज आसमान पर l धरा के लोग खुशियों में डोल रहें हैं खास स्थान पर l काश ऐसी ही सुन्दर सलौनी रात होती रोज _ आज की यह रोशनी आराम दे रही है थकान पर ll ऐसा अद्भूत रूप चाँद का हर लेता है शोक को l रागिनी की भेंट दे रहा है दिल से आज लोक को l घूमने निकल पड़े हैं लोग मदमस्त होकर वादियों में= मधुरता में नहा दिया है मानव के आज हर टोक को ll प्रेमी युगल हर हद पार करने को है आतुर प्यार की l नींद की देवी निहार रही सौंदर्य आज की बहार की l आज की अपूर्व शांति में आनन्द का सागर है उफान पर _ मदहोश करने वाली खुशबु फैली है आज गुलजार की ll (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....