Anilkumar Rathwa (Sameer) 02 Dec 2025 कविताएँ समाजिक “क्रोध नहीं, संयम चुनो” 14537 0 Hindi :: हिंदी
जब क्रोध आये, तो इंसानों से नहीं— अपने मन से लड़ना सीखो, क्योंकि असली युद्ध बाहर नहीं, अंदर उठते तूफ़ानों से होता है। किसी से छीनी गई जीत कभी सुख नहीं देती, लेकिन अपने मन पर पाया गया नियंत्रण जीवन को नयी दिशा दे देता है। और जब मुसीबत दरवाज़ा खटखटाए, तो खुद को दोष मत दो, समय से लड़ो, परिस्थितियों को समझो— क्योंकि हर बुरा वक़्त एक दिन गुज़र ही जाता है। बदलाव न इंसान लाता है, न हालात; असल बदलाव तो मन और समय को समझने वाला लाता है। इसलिए, क्रोध आये तो मन को संभालो, मुसीबत आये तो समय को थामो, यही दोनों कला सीख ली तो जीवन में हार का कोई अर्थ नहीं रहता।