Abhishek Mishra 28 Oct 2025 कविताएँ समाजिक कवि की कलम की पुकार, Kavi Ki Kalam Ki Pukar, Kavi Abhishek Mishra, Ballia Vale Kavi, Abhishek Ki Kavita, Kaviyon Per Kavita 7723 0 Hindi :: हिंदी
कलम न झुकेगी सत्ता के आगे, न बिकेगी दौलत के साए में। सच लिखना ही उसका व्रत है, वो जलेगी समाज की ज्वालाओं में। शब्द नहीं हैं बाजार का माल, ये तो आत्मा का अनमोल दान। जिसे खरीदा जाए नोटों से, वो कविता नहीं—बस है अपमान। पुरस्कारों की जाली चकाचौंध, सच्चे कवि को भटका न पाए। वो तो अंधेरों में दीप बने, सत्य की राह दिखलाए। भ्रम के ताज उतार फेंको, झूठी शोहरत को मिटने दो। साहित्य का धर्म बचा रहे, सच की लौ को जलने दो।