MD SHAYEED ALAM 09 Nov 2025 कविताएँ देश-प्रेम कविता क्या आजाद हैं हम 10424 0 Hindi :: हिंदी
आजाद हैं हम, आजाद हैं हम। क्या सचमुच में आजाद हैं हम? धर्म के नाम पर देश बंटा है, जातिवाद का दर्द बड़ा है। बेरोजगारी का रोग लगा है, नफरत का बाजार सजा है। आजाद हैं हम ,आजाद हैं हम। क्या सचमुच में आजाद हैं हम? भटक रहे हैं लोग दर-दर, उजड़ रहे हैं बहुत सारे घर। नेता हुए आबाद हमारे, लोग हुए बर्बाद हमारे। बात-बात पर झगड़ा करते, नहीं किसी की पीड़ा सुनते। भगत सिंह राजगुरु,असफ़ाकउल्ला खान सबने देश के लिए अपना किया बलिदान। क्या हम लोग रख पाएंगे उनके बलिदान का मान? हम तो बात-बात पर करते हैं एक दूसरे का अपमान। क्या हम ऊंचा कर पाएंगे भारत की शान? तो आओ एक बने हम ,नेक बने हम, मिलकर प्रयत्न अनेक करें हम। आओ मिलकर देश को सचमुच का आजाद करें हम । मिलकर आओ तोड़े धर्म और जाति की दीवार। एक साथ करें बेरोजगारी और गरीबी पर वार। आजाद हैं हम, आजाद हैं हम । क्या सचमुच में आजाद हैं हम?