MD SHAYEED ALAM 07 Jan 2026 कविताएँ समाजिक कविता मोहम्मद सईद आलम 6388 0 Hindi :: हिंदी
कभी-कभी खुद से बातें करना अच्छा लगता है, तन्हा राहों पर अकेला चलना अच्छा लगता है। जिंदगी की भाग दौड़ में खुद को इस कदर भूल चुका हूं मैं, कि खुद की गहराइयों में खुद को ढूंढना अच्छा लगता है। अपने बारे में खुद से कहना खुद से सुनना अच्छा लगता है। कुछ सपने अधूरे रह गए हैं मेरे, उन सपनों को फिर से बुनना अच्छा लगता है। तन्हा राहों पर अकेला चलना अच्छा लगता है।