मोती लाल साहु 22 May 2023 कविताएँ समाजिक तमन्ना-ए-दिल थी- खुशबू बिखेर दूं दिले जहां में, मेरे पवित्र प्रेम का हल्ला मचा दिया- कुछ खास हैं जो अपनों में- दिल तोड़े टुकड़े भी जला दिये- अब देखो ना दिल बोलना नहीं चाहता- प्यार जताने के लिए- ना हीं पाने के लिए। 28444 0 Hindi :: हिंदी
तमन्ना-ए-दिल थी- खुशबू बिखेर दूं दिले जहां में मेरे पवित्र- प्रेम का हल्ला मचा दिया, कुछ खास हैं जो अपनों में दिल- तोड़े टुकड़े भी जला दिये अब देखो ना- दिल बोलना नहीं, चाहता प्यार जताने के लिए ना ही पाने के लिए तमन्ना-ए-दिल थी- खुशबू बिखेर दूं दिले जहां में -मोती