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किसके मन में क्या छिपा

संदीप कुमार सिंह 11 Jul 2026 कविताएँ समाजिक #Google Poems #Poets #For you #Trending Topics #Story #Author #Followers #Nonfollowers 664 0 Hindi :: हिंदी

किसके  मन  में  क्या छिपा हुआ,मजेदार  यह बात। 
जान  सके  कोई  देव नहीं,किसकी है औकात।
भेद  सृष्टि  की  तो  इसमें  ही,कहते   हैं भगवान--
जितना समझो उतना  हैरत,जैसे  है  दिन  रात।।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह*Author*

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