Nisha Kumari 29 Sep 2026 कविताएँ समाजिक किताबों से प्रेम 4792 0 Hindi :: हिंदी
जब पढ़ना शुरु किया जीवन का अर्थ समझ आया नई दिशा नई उमंग की ओर बढ़े कदम चारों ओर।। कभी कुछ वक्त मिला ही नहीं कुछ अलग किया ही नहीं बस किताबों में ही वक्त बिताया मेहनत भी एक दिन रंग लाया।। कभी लगता है बेकार ही वक्त गवाया सफलता हाथ न आई तब मन घबराया फिर भी किताबों ने साथ न छोड़ा आज भी किताबें ही है सहारा।। कहते थे सब कितना पढोगे उनको क्या बताए पढ़ना ही है अपना काम और कुछ आता नहीं है काम किताबों से मिलता जीवन का ज्ञान।।