Ujjwal Kumar 15 Jul 2023 कविताएँ धार्मिक Krishna maare to bachaye kon? Krishan bachaye to maare kon? New poem write by ujjwal kumar 120696 5 5 Hindi :: हिंदी
कृष्ण मारे तो बचाए कौन? कृष्ण बचाए तो मारे कौन? कई जन्मों से प्रतीक्षा कर रहा हुँ, कभी तो मेरी ओर निहारोगे,, एक रावण मेरे मन में भी है, राघव बनकर कब सँहारोगे ? सुना है पतित पावन हो तुम,, मेरा जीवन कब सँवारोगे? अहंकार तम में मन्द पड़ा हुँ,, कन्हैया मुझको कब पुकारोगे ? मैं निम्न कोटि, मैं दुष्ट विकट, मैं विकृत्तियों का स्वरूप प्रकट,, मैं इस काले युग की कालिया , तुम चंद्र-सूर्य की लालीमा,, मेरी नैया भवसागर से, तुम ही पार लगाओ,, माया सोम में मुग्ध पड़ा हुँ, आकर मुझे बचाओ, मृत्युलोक में फसा पड़ा हुँ, तुम नहीं तारोगे, तो तारे कौन? कृष्ण मारे तो बचाए कौन? कृष्ण बचाएँ तो मारे कौन? मैं क्रोध कुण्ठा का हुँ आहार,, तू परमपिता, सर्वसृष्टि आधार, मैं तेरा ही तो सूक्ष्म अंश,, मैं कलि- काल का सर्पदंश, मैं व्यर्थ घमंड में फूला हुँ, मैं नाम रतन को भूला हुँ,, मैं अँघ अज्ञानी अहंकार, मैं दुष्टता की हाहाकार,, मैं अघम् नीच, मैं अति पवित, मैं काम क्रोध, भय का संगीत,, मैं दुष्ट मलीन, चिंतित, कुण्ठित, मैं दास तेरा कलि से भ्रमित,, सुना है जगन्नाथ हो तुम, नाथ ये दास है, बस तेरे सहारे,, सुनलो विनती गोपीनाथ, हे जानकी वल्लभ तारनहारे,, मायानगरी में बंद पड़ा हुँ,, तुम नहीं निकलोगे, तो निकाले कौन? कृष्ण मारे तो बचाए कौन? कृष्ण बचाएँ तो मारे कौन? रचनाकार-✍उज्जवल कुमार
2 years ago
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