Laxmi lshwar Joshi 30 Mar 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत क्षितिज में तारा 32483 0 Hindi :: हिंदी
क्षितिज
क्षितिज से पूछती हूं मैं ,
कहीं दिलबर मेरा देखा ।
जो था अनमोल दिल का हीरा ,
तराशा था जिसने शिद्दत से ।
दिया पत्थर को मुकम्मल आकार ,
उठाकर ठोकरो से जिसने ।
शख्सियत मेरी पुजवा दी ,
देवता था वह मन मंदिर का ,
क्षितिज के शामियाने में ।
मोहब्बत के फूलों की थी गलियां ,
दिलों के आशियाने में ।
लक्ष्मी जोशी "ईशु"
काटोल (नाग.)