Shiwani vishwakarma 20 Jul 2023 कविताएँ समाजिक ख्वहिश,दुनिया, रिस्ते 43074 0 Hindi :: हिंदी
कुछ ख्वाइशों को नजर अंदाज करना पड़ता हैं ।
जिन्दगी का हर तोहफा स्वीकार करना पड़ता हैं।
रिस्तो के उलझे धागों को बार बार सुलझाना पड़ता हैं।
जितना डरोगे उतना डराएगी दुनिया
हँसकर दुनिया को दिखाना पड़ता हैं।
तूफानों की कश्ती में मंजिल भटकने पर
बार बार कश्ती पार लगाना पड़ता हैं।
हर समय बराबर नहीं होता
यह बात खुद को समझाना पड़ता हैं।।
@sivi_vish