Kirti singh 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक कुदरत पनपता है हम सभ के बीच कभी मीरा बनकर तो कभी सरहद का शहीद 142025 0 Hindi :: हिंदी
कुदरत पनपता है हम सभी के बीच कभी मीरा बनकर तो कभी सरहद का शहीद उसके महक का पता होता है कुदरत को हर पल भूल जाए जमाना चाहे उसे कहानी समझ कर कुदरत पनपता है हम सभी के बीच, कभी कुदरत को किसी पन्ने पर लिख जाता है जमाना तो कभी अनजाने में कुदरत को कुचल जाता है जमाना. कुदरत पनपता है हम सभी के बीच.kirti singh