Rambriksh Bahadurpuri 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक #Rambriksh Bahadurpuri Kavita #Rambriksh kavita #Apnrpan per kavita #kya hona tha kya ker baithe 45577 0 Hindi :: हिंदी
कविता -क्या होना था क्या कर बैठे? क्या होना था क्या कर बैठें? जो जैसा था वह है वैसे, सपनों की तुम इस दुनिया में धन दौलत पर क्यों हो ऐंठे , आंख खुली तब पछताया क्या होना था क्या कर बैठें? पंख लगाकर दूर दूर तक तितली सी उड़ जाओगे अपनों में अपनों के जैसा प्यार कहां फिर पाओगे? कहीं आसमां नीलगगन में बन पतंग उड़ जाओगे , सोंचा क्या? फिर कभी नहीं वापस अपनों में आओगे? सूरज चंदा सा चमको पर ध्यान रहे खुद अपनों का, अपने सपने न हो पाते जब फल नही मिलता जतनों का। भूख प्यास बन जीवन जी लो जीवन मधुर मिठास बनें, चार दिनों की जीवन में अपनों में ना खटास भरें, मानवता का सुखद सलोना जीवन में कुछ कर ऐसे, अपनेपन का फूल झड़े हो नवल बसंत जीवन जैसे। रचनाकार -रामबृक्ष बहादुरपुरी अम्बेडकरनगर यू पी
I am Rambriksh Bahadurpuri,from Ambedkar Nagar UP I am a teacher I like to write poem and I wrote ma...