Ritvik Singh 30 Mar 2023 कविताएँ दुःखद Google Yahoo Bing 77704 0 Hindi :: हिंदी
क्यूँकि थोड़ा सा उदास हूँ मै
ज़िंदगी की छोटी आश हूँ मै
आग पे पड़ती बरसात हूँ मै
तेरे झूठे जज़्बात हूँ मै
अपनी कलम की स्याही हूँ मै
ज़माने की महँगाई हूँ मै
इन पहाड़ों की ऊँचाई हूँ मै
किताबों की लिखाई हूँ मै
चाँद की गोलाई हूँ मै
मौत का सुक़ून हूँ मै
किसी की आरज़ू हूँ मै
किसी के लिखे अफ़साने हूँ मै
छिपाने वाला राज़ हूँ मै
आने वाले जुम्मे की नमाज़ हूँ मै
तुम्हारे लिए महज़ मज़ाक़ हूँ मै
किसी का खोया समान हूँ मै
तो किसी का टूट्टा मकान हूँ मै
अपनो से दूर हूँ मै
हारा हुआ ग़ुरूर हूँ मै
एक टूटा एहसास हूँ मै
क्यूँकि थोड़ा सा उदास हूँ मै
:- Ritvik Singh