Sudha Chaudhary 31 May 2023 कविताएँ दुःखद 26795 0 Hindi :: हिंदी
क्यों मन आज बहुत विचलित है सांसें अटक गई है आत्मा असंख्य नाद से पीड़ित हैं रोता है मन, पीड़ा पर वार करूं कैसे? हंसती है आज दिशाएं मुझ पर ताली देकर, नीरव शुष्क हदय पर, पत्थर की आशा देकर। कब तक मान करूं, अपने भाग्य सृजन का। नहीं अवतरित होगा कोई, साथी दीन निराश पथ का। सुधा चौधरी बस्ती