प्रवीण कुमार 21 Oct 2025 कविताएँ दुःखद 16867 1 5 Hindi :: हिंदी
लाशों की गिनती गुनाहों के साथ नहीं होती। हां, गुनाहा को समझ पाते । वो कि हम -तुम, शायद! हो ही जाता कि सबके सामने वो लाश नहीं होती। नज़रिया तो बदला जाता, फैसला तो नहीं । हां, करने से पहले गुनाह की पहचान नहीं होती। लाशों की गिनती गुनाहों के साथ नहीं होती। आप तो निष्कर्ष निकाल लेंगे , विचार भी कर लेंगे। लेकिन सच मानिए, फैसला सही से नहीं हो सकेगा। आप के पास सही गुनाह की तस्वीर नहीं होती। लाशों की गिनती गुनाहों के साथ नहीं होती। मैं तो यहां तक कहूंगा गुनाह को सही से समझना , मेरे -तेरे लिए सही विकल्प भी नहीं । लाशों की गिनती गुनाहों के साथ नहीं।
3 weeks ago