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मां एक शब्द नहीं,

MD SHAYEED ALAM 07 Nov 2025 कविताएँ समाजिक कविता मां 15307 0 Hindi :: हिंदी

मां एक शब्द नहीं, 
समूचा संसार है। 
बिन मां के जीवन, 
यह दुश्वार है। 
मां है तो घर में, 
खुशियां अपार है। 
मां के जाने के बाद, 
सुना सब घर बार है। 
करो सदा मां की सेवा तुम, 
मां के चरणों में स्वर्ग का द्वार है। 
मां ने ही हमें जीवन दिया, 
उसी ने दिया सारा संस्कार है। 
उसी मां से तू हो गया है दूर,
आज बड़ा तेरा कारोबार है। 
मां क्या है यह उससे पूछ, 
जिससे छिन गया मां का प्यार है। 
कैसे उतारेगा कर्ज उसका, 
अनगिनत उसका उपकार है। 
मत दुखाओ कभी दिल उसका, 
संसार में नि: स्वार्थ बस उसका प्यार है।।

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