Rambriksh Bahadurpuri 17 Jul 2026 कविताएँ समाजिक #Rambriksh bahadurpuri # Ambedkar Nagar poetry # Naari per kavita#Beti per kavita #samajik kavita#mai us samaaj ki beti hun 389 0 Hindi :: हिंदी
मैं उस समाज की बेटी हूॅं जहां पैदा होने पर लोग खुश होते हैं कि- “ बनाने खिलाने वाली आ गयी ” बड़ी होने पर हाथों में चौका बेलन थमा दिया जाता है, शादी विवाह के मौके पर कौन पूछता है डिग्रियां? बस बनाने खिलाने वाली हो, हां खाना अच्छा बनाती है सारा काम अच्छे से कर लेती है घर यही सम्हालती है, फिर पूरा जीवन सेवा भाव में बांट देती हूॅं। मर्यादा का घूंघट ओंठो पर मुस्कान मन पर बोझ अंतर्मन में सन्नाटा सपनों के अंत के जंजीर से बंधी आशा के पुल बांधती जीवन काट देती हूॅं रामवृक्ष बहादुरपुरी अम्बेडकरनगर उत्तर प्रदेश
I am Rambriksh Bahadurpuri,from Ambedkar Nagar UP I am a teacher I like to write poem and I wrote ma...