Avnish Dutt 11 May 2026 कविताएँ बाल-साहित्य Maa, poem for mother's day, poem for mother, maa k liye kavita, maa mera sansar 5163 0 Hindi :: हिंदी
*माँ: मेरा संसार* जब मैं इस संसार में आया, सबसे पहले तेरा आँचल ही पाया। बोल मैं कुछ भी नहीं सकता था, अभिव्यक्ति भी नहीं दे सकता था। हर रिश्ता मुझसे अनजाना था, पर तूने मेरी हर ज़रूरत को पहचाना था। तू ही है माँ, तुझे सारा इतिहास पता है, मेरे आज तक के सफ़र के सारे राज़ पता हैं।। तेरे हर रूप में मुझे नया अवतार दिखा है, कभी तू यशोदा मैया-सा दुलार करती है, तो कभी माँ काली बनकर मेरे अवगुणों का संहार करती है। तुझे बस देख लेने भर से ही, सुकून मिलता है, घर के आँगन का, फूल-फूल खिलता है।। तेरे बिना जीने की मैं कल्पना भी नहीं कर सकता, माँ। तुझे देखकर ही हमारा हर दिन बनता है।। अवनीश दत्त